‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस प्रशिक्षण' शिविर

अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्‍वविद्यालय, भोपाल

‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस प्रशिक्षण' शिविर

प्रतिवेदन

 

दिनांक, 3 मई 2019 

           योग शिविर का द्वितीय दिवस प्रार्थना से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम कराया गया। आसनों की श्रेणी में सर्वप्रथम बैठकर करने वाले आसनों से शुरुआत की गई। जिसके अंतर्गत जानुसिरासन, पश्चिमोत्तानासन, गोमुखासन, अर्द्धउष्ट्रासन का अभ्यास किया गया। इसके पश्चात् पीठ के बल किए जाने वाले आसनों में पवनमुक्तासन, उत्तानपादासन, सेतुबंधासन, नोकासन का अभ्यास कराया गया। क्रिया के रूप में कपालभांति का अभ्यास कराया गया। प्रणायाम में नाड़ी शोधन, भ्रामरी एवं ओम का दीर्घ उच्चारण करवाया गया। शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।’ के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 45 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              
                                      
दिनांक, 04 मई 2019 

           योग शिविर का तृतीय दिवस प्रार्थना संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम कराया गया। आसनों की श्रेणी में सर्वप्रथम खडे होकर करने वाले आसनों से शुरुआत की गई। जिसके अंतर्गत ताड़ासन, तिर्यक ताडा़सन, त्रिकोणासन, वृक्षासन का अभ्यास किया गया। इसके पश्चात् बैठकर किये जाने वाले आसन में ध्यानात्मक पर्वतासन, वक्रासन का अभ्यास कराया गया। प्रणायाम में नाड़ी शोधन, भ्रामरी एवं ओम का दीर्घ उच्चारण करवाया गया। शनिवार का यह दिन विशेष रूप से ध्यान हेतु सुनिश्चित किया गया जिसके अंतर्गत शरीर को पूर्णतः शिथिल एवं मन को शांत कर श्वास-प्रश्वास पर 30 मिनिट ध्यान का अभ्यास करवाया गया। 
           अभ्यासोपरांत सभी अभ्यासियों के लिए यह नुतन एवं आंनदमय अनुभव रहा। शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।’ के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 42 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              
                                     
दिनांक, 06 मई 2019 

            योग शिविर का चतुर्थ दिवस प्रार्थना संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम कराया गया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के समान्य योग प्रोटोकाॅल के पुर्व अभ्यासों को करवाया गया। अभ्यासियों की जिज्ञासा के अनुरूप सूर्य नमस्कार का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। सूर्य नमस्कार के 12 आसनों को सिखाते हुए उनकी विधि एवं लाभ सभी को बतलाये गये। सूर्य नमस्कार के चार चक्रों के बाद शिथलीकरण हेतु 5 मिनिट का शवासन कराया गया। इसके बाद प्रणायाम में शीतली, नाड़ी शोधन, भ्रामरी एवं ओम का दीर्घ उच्चारण करवाया गया। अभ्यासोपरांत सभी अभ्यासियों के लिए सूर्य नमस्कार का सुखद अनुभव रहा। 
            शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।’ के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 55 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              

दिनांक, 07 मई 2019 

          योग शिविर का पंचम दिवस प्रार्थना संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम, स्थिर दौड़, गत्यात्मक अभ्यास करवाए गए। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रशिक्षण शिविर के अंतर्गत अन्य गतिविधि में विशेष योग नृत्य शैली को संगीत के साथ जोड़कर इसका अभ्यास विश्वविद्यालय के योग एवं मानव चेतना विभाग की छात्रा सचिता शर्मा द्वारा कराया गया। इस अभ्यास में 20 वर्ष से 80 वर्ष तक की आयु के अभ्यासी सम्मिलित हुए। अन्य गतिविधियों के अंतर्गत इस नवीन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके पश्चात् शवासन का अभ्यास शिथलीकरण हेतु कराया गया। 
    प्रणायाम में नाड़ी शोधन, भ्रामरी एवं ओम का दीर्घ उच्चारण करवाया गया। शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।’ के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 60 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              
                          
दिनांक, 08 मई 2019 

           योग शिविर का षष्ठ दिवस प्रार्थना संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम, स्थिर दौड़, गत्यात्मक अभ्यास करवाए गए। सर्वप्रथम बैठकर करने वाले आसनों से शुरुआत की गई। जिसके अंतर्गत जानुसिरासन, पश्चिमोत्तानासन, गोमुखासन, वज्रासन, शशांकासन, अर्द्धउष्ट्रासन का अभ्यास किया गया। इसके पश्चात् पीठ के बल किए जाने वाले आसनों में पवनमुक्तासन, उत्तानपादासन, अर्द्धहलासन, सेतुबंधासन, नोकासन का अभ्यास कराया गया। क्रिया के रूप में कपालभांति का अभ्यास कराया गया।
          प्रणायाम में शीतली, नाड़ी शोधन, भ्रामरी एवं ओम का दीर्घ उच्चारण करवाया गया। शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।’ के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 42 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              

                                    
दिनांक, 09 मई 2019 

           योग शिविर का सातवां दिवस प्रार्थना संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम में ग्रीवा संचालन, स्कंध संचालन, कटि संचालन, घुटना संचालन, टखना संचालन करवाया गया। खड़े होकर किए जाने वाले आसनों में कटिचक्रासन, पादहस्तासन, ताड़ासन, तिर्यकताड़ासन, त्रिकोणासन का अभ्यास कराया गया। अभ्यासियों ने सूर्य नमस्कार के 06 चक्रों का अभ्यास भी किया। इसके पश्चात् लेटकर श्वास-प्रश्वास सामान्य होने के बाद पीट के बल लेटकर किए जाने वाले अभ्यास पवनमुक्तासन, पादचक्रासन, मरकटासन, अर्द्धहलासन, मत्स्यासन का अभ्यास किया। तत्पश्चात् 05 मिनट शवासन कर, क्रिया में कपालभांति के तीन चक्र किए। 
           प्रणायाम में शीतली, नाड़ी शोधन, भ्रामरी एवं ओम का दीर्घ उच्चारण करवाया गया। शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।’ के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 37 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              

                                        
दिनांक,10 मई 2019 

            योग शिविर का आठवां दिवस प्रार्थना संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम में ग्रीवा संचालन, स्कंध संचालन, कटि संचालन, घुटना संचालन, टखना संचालन करवाया गया। बैठकर किए जाने वाले आसनों में सिंहासन, उत्तानमंडूक आसन, वक्रासन, शशांक आसान, मंडूक आसन का अभ्यास कराया गया। इसके पश्चात् लेटकर श्वास-प्रश्वास सामान्य होने के बाद पीट के बल किए जाने वाले अभ्यास श्रेणी में पवनमुक्तासन, पादउत्तान आसन, अर्द्धहलासन, मत्स्यासन का अभ्यास किया। इसके बाद पेट के बल लेटकर भुजंगासन, सर्पासन, नाभ्यासन, तिर्यकभुजंगासन का अभ्यास करवाते हुए इन आसनों के लाभ बतलाए गए।  तत्पश्चात् 05 मिनट शवासन कर, क्रिया में कपालभांति के तीन चक्र किए। 
            प्रणायाम में शीतली, नाड़ी शोधन, भ्रामरी एवं ओम का दीर्घ उच्चारण करवाया गया। शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।श्श् के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 42 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              

                                        
 दिनांक, 11 मई 2019 

           योग शिविर का नवां दिवस प्रार्थना संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम करवाया गया। शनिवार का यह दिन ध्यान हेतु सुनिश्चित किया गया है। ध्यान क्रिया के रूप में ‘चक्रिय ध्यान’ का अभ्यास करवाया गया। यह अस्थिरता से स्थिरता की ओर साधक को प्रेषित करता है। चक्रिय ध्यान का अभ्यास 45 मिनट का रहा। इसके पश्चात् प्रणायाम में शीतली, नाड़ी शोधन, भ्रामरी एवं ओम का दीर्घ उच्चारण करवाया गया। शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।श्श्  के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 38 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              

दिनांक,13 मई 2019 

            योग शिविर का दसवा दिवस प्रार्थना संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। आज का अभ्यास खड़े होने वाले आसनों की श्रेणी से आरंभ किया गया। जिसके अंतर्गत कटिचक्रासन, त्रिकोणासन, नटराजासन, पादहस्तासन, वृक्षासन का अभ्यास कराते हुए इनसे होने वाले लाभों से भी अवगत कराया गया। इसके पश्चात् पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले अभ्यासों में अर्द्धपवनमुक्तासन, पूर्णपवनमुक्तासन, उत्तानपादासन, अर्द्धहलासन का अभ्यास करवाया गया। इसके उपरांत कपालभाती का अभ्यास कराते हुए इस क्रिया से होने वाले लाभ अभ्यासियों को बतलाए गए। 
            प्रणायाम में शीतली, नाड़ी शोधन, भ्रामरी एवं ओम का दीर्घ उच्चारण करवाया गया। शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।श्श् के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 32 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              

दिनांक,14 मई 2019

           योग शिविर का ग्यारहवां दिवस प्रार्थना संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते से आरंभ करते हुए किया गया। इसके बाद सूक्ष्म व्यायाम प्रतिदिन की तरह अभ्यास कराया गया। आसनों का आरंभ बैठकर तितली आसन, भद्रासन, वक्रासन से किया। इसके बाद पीठ के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में पादचक्रासन (दो प्रकार), नोकासन, पवनमुक्तासन, अर्द्धहलासन, सेतुबंधासन, मत्स्यासन का अभ्यास कराया गया। इसके बाद पेट के बल लेटकर भुजंगासन अर्द्धशलयासन, पूर्ण शलयासन का अभ्यास कराया। शवासन की स्थिति में 5 मिनट का शिथलीकरण किया गया। 
           क्रिया में कपालभांति, प्रणायाम में नाड़ीशोधन, शीीतली, भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।श्श् के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 46 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              

                                        
दिनांक,15 मई, 2019

            अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का बाहरवां दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए किया गया। सूक्ष्म व्यायाम गर्दन, कंधे, कलाई, छाती, कमर, जंघा, घुटने, टखना का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् खड़े होकर किये जाने वाले आसनों में कटिचक्रासन, वृक्षासन, उत्कटासन, वीरासन का अभ्यास कराया गया। आज सूर्य नमस्कार के चक्रों में वृद्धि करते हुए 08 चक्रों तक सभी सहभागियों ने उत्साहपूर्वक अभ्यास किया। 5 मिनट का श्वासन, शिथिलीकरण के लिए किया गया। इसके पश्चात् बैठकर किये जाने वाले आसनों में पश्चिमोत्तानासन, मण्डूकासन, सेतुआसन, सुप्तवज्रासन का अभ्यास कराया गया। 
            क्रिया में कपालभांति, प्रणायाम में शीतली, सीतकारी, नाड़ीशोधन एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद 10 मिनट श्वास-प्रश्वास पर ध्यान का अभ्यास कराया गया। इसके पश्चात् शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।श्श् के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आहार को सामान्य रूप से खाने की अपेक्षा तीन-चार भागों में खाने की सलाह दी गई। इससे पाचन क्रिया दृढ़ होगी तथा समस्त स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत लाभदायक प्रक्रिया है। आज के अभ्यास में 50 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              

दिनांक,16 मई, 2019 

           अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का तेरहवां दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए किया गया। आज दिनांक 16 मई 2019 को अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के योग एवं मानव चेतना विभाग के पतंजलि भवन में पाँचवे अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित योग शिविर के प्रथम चरण संपन्न होने पर योग केन्द्र के निदेशक योगाचार्य श्री देवीदयाल भारती का व्याख्यान हुआ। जिसमें योगाचार्य द्वारा प्रथम चरण के विषय ‘‘मोटापा प्रबंधन’’ पर अपने विचार व्यक्त किए। मोटापा विषय पर उन्होंने विस्तृत जानकारी देते हुए वर्तमान समय में होने वाली बीमारियों, आहार एवं जीवन को योग के माध्यम से और अधिक कैसे स्वस्थ्य रखा जा सकता है, की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही योग क्या है, योग और स्वास्थ्य तथा योग के माध्यम से स्वस्थ एवं सुखी जीवन कैसे प्राप्त किया जा सकता है, की महत्वपूर्ण जानकारी योगाभ्यासियों को दी। 
            विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय प्रो.रामदेव भारद्वाज ने इस विशेष व्याख्यान का मार्गदर्शन किया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डाॅ. बी.भारती द्वारा सभी योगाभ्यासियों को प्रथम चरण पूर्ण होने पर शुभकामनाएँ दी। योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर द्वारा योगाचार्य श्री देवीदयाल भारती जी को विश्वविद्यालय की ओर से तुलसी पौधा भेंटस्वरूप प्रदान कर सम्मानित किया एवं कार्यक्रम का आभार व्यक्त करते हुए भारती जी को अपना बहुमूल्य समय देने पर धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा प्रातः 06ः00 बजे से सतत् आ रहें सभी साधकों का उत्साहवर्धन करते हुए मंगल कामनाएँ दी। अन्त में योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा ने इसके पश्चात् शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' करवाते हुए कार्यक्रम को विराम दिया।

                              
                                        
दिनांक,17 मई, 2019 

            अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का चैदवा दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्मव्यायाम  का अभ्यास करवाया गया। 02 मई 2019 से चल रहें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रशिक्षण शिविर के प्रथम चरण मोटापा प्रबंधन का अंतिम दिन रहा, जिसके अन्तर्गत पूर्व में कराऐं गए अभ्यासों को दौहराया गया। सूर्यनमस्कार का अभ्यास कराया गया। पूर्व में किये गए प्राणायामों का अभ्यास भी करवाया गया। प्रथम चरण के अंतिम दिवस विशेष गतिविधी के रूप में शुद्धि क्रियाओं का अभ्यास करवाया गया, जिसमें मुख्यतः वमन धौति, जलनेति एवं कपालभाति का अभ्यास किया गया। 
            आज के अभ्यास में लगभग 35 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज कराई एवं सभी ने उत्साहपूर्वक इस नए अनुभव का भरपूर आनंद लिया। वमन धौति के लिए सभी को चार से आठ गिलास तैयार किया हुआ जल पिलाया गया और फिर इसकी सही क्रिया विधी से अभ्यास कराया गया। इसके पश्चात जलनेति एवं कपालभांति का अभ्यास करवाया गया। सभी अभ्यासियों को इन शोधन क्रियाओं की सही प्रक्रिया एवं लाभो से अवगत कराया गया। आहार जो कि स्वास्थ्य का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है, इसके विषय में परामर्श देते हुए हल्का, सुपाच्य एवं सात्विक आहार लेने को कहा गया। इसके पश्चात् शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।श्श् के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                               
                                        
दिनांक,18 मई, 2019

           अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के प्रथम दिवस का आरंभ प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए योग द्वारा उच्च रक्तचाप/निम्न रक्तचाप एवं मधुमेह का प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी अभ्यासियों को दी गई। सभी अभ्यासियों को उच्च रक्तचाप/निम्न रक्तचाप एवं मधुमेह क्या है, इसके कारण एवं योग के माध्यम से कैसे इसका निवारण किया जा सकता है विषय पर जानकारी प्रदान की गई। 
           शनिवार का यह दिन ध्यान हेतु सुनिश्चित किया गया जिसके अंतर्गत ‘सहज ध्यान’ का अभ्यास करवाया गया। अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय की छात्रा सुमन दशोरा ने सभी को ‘सहज ध्यान’ की विधि एवं लाभ से अवगत कराते हुए सभी को इस ध्यान का अभ्यास कराया। ध्यान के पूर्ण होने पर सभी से इसके अनुभव के बारे में पूछा गया, जो सकारात्मक रहा। 
    अंत में  शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 23 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              

दिनांक 20 मई, 2019 

           अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के द्वितीय दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया, जिसके अंतर्गत गर्दन, कंधे, कलाई, कमर, जंघा, घुटने, टखना आदि का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् बैठकर किये जाने वाले अभ्यास में वक्रासन, अर्द्धमत्स्येन्द्रासन, गोमुखासन, मण्डूकासन, शशकासन, उष्ट्रासन, व्याघ्रासन का अभ्यास कराया गया। इसके पश्चात् पीठ के बल लेटकर किये जाने वाले अभ्यासों में पवनमुक्तासन, मरकटासन, नौकासन, सेतुबंधासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् पेट के बल लेटकर भुजंगासन एवं शलभासन का अभ्यास करवाया गया। तत्पश्चात् 5 मिनट के शवासन से सभी अभ्यासियों को शिथलीकरण करवाया गया। 
           क्रिया में कृपालभांति के तीन चक्र, प्रणायाम में नाड़ीशोधन, शीतली एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया तथा  शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।श्श् के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 31 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                               

दिनांक 21 मई, 2019 

          अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के तृतीय दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम एवं कुछ गत्यात्मक अभ्यास करवाये गए। बैठकर किये जाने वाले अभ्यास के क्रम में चक्की चालन, नौकासंचालन, जानुसिरासन, पश्चिमोत्तानासन, वक्रासन, वज्रासन, सुप्त वज्रासन, शशांकासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात पेट के किये जाने वाले अभ्यास क्रम में मकरासन (प्रकार 1, 2, 3), भुजंगासन, नाभ्यासन, तिर्यक भुजंगासन, धर्नुआसन, बालासन का अभ्यास करवाया गया।
           प्राणायाम में नाड़ीशोधन का 12 मिनट तक अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् उच्चरक्तचाप के रोगियों के लिए बहुत उपयोगी शीतली तथा सीतकारी प्राणायाम का अभ्यास करवाते हुए इनके लाभों से सभी को अवगत कराया गया। शांति पाठ ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 37 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              

दिनांक 22 मई, 2019 

          अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के चतुर्थ दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए खड़े होकर सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। खड़े होकर किये जाने वाले आसनों से अभ्यास करवाते हुए कटिचक्रासन, अर्द्धचक्रासन, तिर्यक ताड़ासन, पाश्र्व कोणासन, पादहस्तासन, उत्कटासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् सूर्यनमस्कार के 6 चक्र करवाये गये। शिथलीकरण हेतु 5 मिनट श्वासन का अभ्यास करवाया गया। तदोपरांत पीठ के बल किये जाने वाले अभ्यासों में साइकल चालन, पादचक्रासन, पवनमुक्तासन, उत्तानपादासन, अर्द्धहलासन, मरकटासन, नौकासन, सेतुबंधासन का अभ्यास करवाया गया।
          क्रिया में कपालभांति एवं प्रणायाम में नाड़ीशोधन, शीतली, सीतकारी एवं भामरी का अभ्यास करवाया गया। तीन बार दीर्घ ओम का उच्चचारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 32 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया। 

                              

दिनांक 23 मई, 2019

          अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के पंचम दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रतिदिवस के समान प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ किया गया। इसके पश्चात् सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। आसनों के क्रम में खड़े होने वाले आसनों से अभ्यास आरंभ करवाया गया, जिसके अंतर्गत त्रिकोणासन, ताड़ासन, वृक्षासन, अर्द्धकटिचक्रासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् बैठकर किये जाने वाले आसनों में वक्रासन, गोमुखासन, मण्डूकासन, शशांकासन, उष्ट्रासन का अभ्यास करवाया गया। इसके उपरांत पीठ के बल लेटकर अर्द्धपवनमुक्तासन, पूर्ण पवनमुक्तासन का अभ्यास किया गया। तत्पश्चात् पेट के बल किये जाने वाले अभ्यासों में भुजंगासन, शलभासन, मकरासन, बालासन का अभ्यास करवाया गया। 
          5 मिनट का शवासन किया गया। इसके बाद प्राणायाम में नाड़ीशोधन, शीतली, सीतकारी एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 43 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक 24 मई, 2019 

           अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के षष्ट दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम की श्रेणी में गर्दन, कंधे, कलाई, कमर, जंघा, घुटने, टखना का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् खड़े होकर किये जाने वाले आसनों में ताड़ासन, वृक्षासन, नटराजासन, उत्कटासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद सूर्यनमस्कार के आठ चक्रों का अभ्यास श्वास-प्रश्वास के साथ करवाया गया। शिथलीकरण के लिए 5 मिनट का श्वासन करवाया गया। 
            इसके बाद पीठ के बल किये जाने वाले आसनों में पवनमुक्तासन, उत्तानपादासन, अर्द्धहलासन, चक्रासन, द्रुतहलासन, सेतुबंधासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद प्राणायाम में नाड़ीशोधन, शीतली एवं भ्रामरी का अभ्यास किया गया। शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 36 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक 25 मई, 2019

           अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के सप्तम दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम की श्रेणी में गर्दन, कंधे, कलाई, कमर, जंघा, घुटने, टखना का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् खड़े होकर किये जाने वाले आसनों में उत्कटासन, त्रिकोणासन, कटिचक्रासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद बैठकर किये जाने वाले आसनों मेें तितली आसन, भूनमनासन का अभ्यास करवाया गया। क्रिया में कपालभांति के तीन चक्रों का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद प्राणायाम में नाड़ीशोधन, शीतली, सूर्यभेदी, चंद्रभेदी, उज्जायी एवं भ्रामरी का अभ्यास किया गया। 
            योग प्रशिक्षण शिविर में शनिवार का दिन मुख्यतः ध्यान हेतु सुनिश्चित किया गया है। ध्यान भारत की प्राचीन विद्या है जिसका उद्देश्य मानसिक शांति, एकाग्रता, दृढ़ मनोबल, ईश्वर का अनुसंधान, मन को निर्विचार करना एवं जीवन को सही व सकारात्मक दिशा देना है। जिसके अन्तर्गत आज ‘‘01 घण्टे 10 मिनिट’’ तक ध्यान का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 34 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  27 मई, 2019 

           अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के नवम दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रार्थना ''संंगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ किया गया। इसके पश्चात् सूक्ष्म व्यायाम में गर्दन, कंधे, कमर, कलाई, जंघा, घुटना, टखना का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् खड़े होने वाले आसनों के क्रम में ताड़ासन, अर्द्धकटिचक्रासन, पादहस्तासन, नटराजासन, एकपादसंतुलनासन, वीरासन का अभ्यास करवाया गया। 
           इसके बाद बैठकर किये जाने वाले आसनों में पद्मासन पर्वतासन, वज्रासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् पीठ के बल लेटकर कये जाने वाले आसनों में पवनमुक्तासन, पादउत्तानासन, नौकासन, सेतुबंधासन, मत्स्यासन का अभ्यास करवाया गया। क्रिया में कपालभांति का अभ्यास करवाते हुए प्राणायाम में नाड़ीशोधन, शीतली एवं भ्रामरी का अभ्यास किया गया। शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 32 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  28 मई, 2019

           अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के दसवें दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम करवाया गया। इसके पश्चात् खड़े होकर किये जाने वाले आसनों के क्रम में कटिचक्रासन, ताड़ासन, द्विपादकोणासन, पाश्र्वकोणासन, उत्कटासन का अभ्यास करवाया गया। 
            इसके बाद सूर्यनमस्कार के 6 चक्रों का अभ्यास श्वास-प्रश्वास सहित करवाया गया। इसके पश्चात् पीठ के बल लेटकर कये जाने वाले आसनों में उत्तानपादासन (कोण - 30°, 60°, 90°)  नौकासन, पवनमुक्तासन, मरकटासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद पेट के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में मकरासन, भुजंगासन, शलभासन, एवं बालासन का अभ्यास करवाया गया। इसके उपरांत 5 मिनट शिथलीकरण हेतु शवासन करवाया गया। क्रिया में कलालभांति, प्राणायाम में शीतली, नाड़ीशोधन एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 39 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  29 मई, 2019 

            अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के ग्यारवें दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रार्थना ''सगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम करवाया गया। इसके पश्चात् खड़े होकर किये जाने वाले आसनों के क्रम में कटिचक्रासन, ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, उत्कटासन, वृक्षासन का अभ्यास करवाया गया। 
            इसके पश्चात् पीठ के बल लेटकर कये जाने वाले आसनों में साईकिलचालन, उत्तानपादासन (कोण - 30°, 60°, 90°) नौकासन, पवनमुक्तासन, सेतुबंधासन का अभ्यास करवाया गया। इनके लाभों से अवगत कराया गया। इसके पश्चात् बैठकर किये जाने वाले आसनों में जानुसिरासन, पश्चिमोच्तानासन, वृक्षासन, मण्डूकासन, उब्ट्रासन, मार्जरी आसन एवं सिहांसन का अभ्यास कराया गया। 
           उच्चरक्तचाप के रोगियों को चंद्रभेदी एवं मुख्यतः शीतली प्राणयाम का दीर्घ अभ्यास करवाया गया। बाकी सभी को कपालभाॅति क्रिया, नाड़ीशोधन एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। तीन बार दीर्घ  ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 35 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  30 मई, 2019
          सरल योगाभ्यास द्वारा मधुमेह का बचाव एवं संतुलन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के बारहवें दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् बैठकर किये जाने वाले आसनों के क्रम में वक्रासन, अर्द्धमत्स्यन्द्रासन, गोमुखासन, तितली आसन, पद्मासन का अभ्यास करवाया गया। 
           इसके पश्चात् सूर्यनमस्कार के 10 चक्रों का अभ्यास करवाया गया। सूर्यनमस्कार के बाद सभी अभ्यासियों को 05 मिनट का शवासन करवाया गया। इसके बाद पेट के बल लेटकर किये जाने वाले अभ्यासों में विपरीत नौकासन, भुजंगासन, मकरासन, धर्नुआसन, बालासन का अभ्यास करवाया गया। क्रिया में कपालभाॅति, प्राणायाम में नाड़ीशोधन, उज्जायी, सीतकारी एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ'' सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 33 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  31 मई, 2019

             पाचन एवं श्वसन संस्थान के संतुलन हेतु योग 
            अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के तेरवा दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् पीठ के बल लेट कर किये जाने वाले आसनों में पवनमुक्तासन, पादचक्रासन (एक पाद, द्विपाद), उत्तानपादासन (कोण - 30°, 60°, 90°) नौकासन, मरकटासन, सेतुबंधासन का अभ्यास करवाया गया। इन विशेष आसनों का सीधा प्रभाव उदर क्षेत्र को प्राप्त होता है जिससे पाचन संस्थान दृढ़ होता है। 
             इसके बाद पेट के बल लेटकर किये जाने वाले अभ्यासों में भुजंगासन, मकरासन, धर्नुआसन, शलभासन, बालासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् सभी अभ्यासियों को 05 मिनट का शवासन करवाया गया।  क्रिया में कपालभाॅति, प्राणायाम में नाड़ीशोधन, शीतली एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद अलग-अलग प्रकार से तालीयाॅ बजबायी गई एवं इनके लाभ भी बतलाए गये। तीन बार ''ॐ'' दीर्घ का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 35 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  01 जून, 2019

                        ‘‘ध्यान-संतुलन, शांति एवं आनंद’’
            अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के चौदहवें दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम श्वास-प्रश्वास के साथ करवाया गया। इसके पश्चात् क्रिया के रूप में कपालभांति के तीन चक्रों का अभ्यास करवाया गया। प्राणायाम का अभ्यास करवाते हुए नाड़ीशोधन, शीतली एवं भ्रामरी के लाभों से अवगत करवाया गया। आसनों में आज ध्यानात्मक पर्वतासन एवं भू-नमनासन का अभ्यास करवाया गया है। 
आज शनिवार का दिन जो ध्यान हेतु सुनिश्चित किया गया है जिसके अंतर्गत 45 मिनिट ध्यान का अभ्यास करवाया गया। किसी भी एक सुखद-ध्यानात्मक स्थिति में बैठाकर, सुमधुर संगीत के साथ हृदय प्रदेश पर ध्यान एकाग्रचित करवाया गया। समय-समय पर उचित निर्देशों के साथ ध्यान को आगे बढ़ाते हुए मन को पूर्णतः शांत एवं हृदय को आनंदमय भावों से ओतप्रोत करने हेतु दिशा-निर्देश दिये गये। संपूर्ण वातावरण शांत, स्वस्थ, सुखद एवं आनंदमय रहा। 
            तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 41 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  03 जून, 2019

              ‘‘योग द्वारा निम्न रक्तचाप का प्रबंधन’’
             अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दूसरे चरण के 16वें दिवस अंतरराष्ट्रीय योग शिविर का प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ किया गया। इसके पश्चात् सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद बैठकर किये जाने वाले आसनों के क्रम में पश्चिमोत्तानासन, सेतुआसन, वज्रासन, मण्डूकासन, ऊष्ट्रासन, शशांकासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् पीठ के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों के क्रम में पवनमुक्तासन, आनंदबालासन, उत्तानपादासन, मरकटासन, पादअंगुष्ठसिरासन का अभ्यास करवाया गया। 
              इसके बाद पेट के बल लेटकर किये जाने वाले अभ्यासों में मकरासन, नाभ्यासन, शलभासन, पर्वतासन (अधोमुखश्वानासन) का अभ्यास करवाया गया। क्रिया में कपालभांति, प्राणायाम में नाड़ीशोधन, सीतकारी, भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। आहार योजना के विषय में जानकारी प्रदान करते हुए शारीरिक एवं मानसिक आहार का लाभ बताया गया एवं आहार लेने का सही तरीका भी बतलाया गया। 
             तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 42 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  04 जून, 2019

            ‘‘मनोकायिक रोगों में योग की भूमिका’’ : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण आरंभ हुआ। जिसका विषय ‘‘मनोकायिक रोगों में योग की भूमिका एवं ध्यान शिविर’’ है। आधुनिक युग की विकृत जीवनशैली एवं जीवन की आपाधापी के कारण रोगों की जैसे बाढ़ सी आ गयी है। इनमें मनोकायिक रोगों की अप्रत्याशित वृद्धि स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट का कारण बनी हुई है। इनकी जटिल एवं सूक्ष्म प्रकृति के कारण आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इनके सामने असहाय बना हुआ है। 
             योग अपनी समग्र एवं सूक्ष्म दृष्टि के कारण समग्र स्वास्थ्य का आश्वासन दे रहा है। मनोकायिक रोग मन की गहराईयों में पलते हैं व शरीर के धरातल पर प्रकट होते हैं। आसन एवं प्राणायाम के साथ ध्यान की प्रक्रिया को जोड़ने से योग समस्त स्वास्थ्य का वरदान बन जाता है। तनाव जन्य रोगों एवं मनोरोगों की आंधी आज जब थमने का नाम नहीं ले रही है, ऐसे में ध्यान एक प्रभावी उपचार के रूप में सामने आया है। विश्वविद्यालय का अगला चरण इसी बिन्दु पर केन्द्रित करते हुए योजनाबद्ध है।
             तृतीय चरण का प्रथम दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ किया गया। इसके पश्चात् सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् खड़े होने वाले आसनों के क्रम में कटिचक्रासन, ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन का अभ्यास श्वास-प्रश्वास पर ध्यान रखवाते हुए करवाया गया। इसके पश्चात् पीठ के बल लेटकर पवनमुक्तासन, उत्तानपादासन, मटकटासन, कंधरासन का जागरूकता के साथ अभ्यास करवाया गया। इसके बाद पेट के बल लेटकर भुजंगासन, शलभासन, मकरासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् 15 मिनट शवासन में सभी की शिथलीकरण का अभ्यास करवाया गया। 
             क्रिया में कपालभांति, प्राणायाम में शीतली, शीतकारी एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 42 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  05 जून, 2019

            ‘‘पेट की अतिरिक्त वसा कम करने हेतु योग’’ 
           अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण के द्वितीय दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ किया गया। इसके पश्चात् खड़े होकर सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद बैठकर किये जाने वाले आसनों में वक्रासन, जानुसिरासन, पश्चिमोत्तानासन, सेतुआसन का अभ्यास करवाया गया। 
            इसके बाद पीठ के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में साइकल चालन, पादचक्रासन, पवनमुक्तासन, पादउत्तानासन (कोण - 30°, 60°, 90°-कोण ) मरकटासन का अभ्यास करवाया गया। पेट के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में भुजंगासन, तिर्यक भुजंगासन, शलभासन का अभ्यास करवाया गया। क्रिया में कपालभांति, प्राणायाम में नाड़ीशोधन, शीतली एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ आज के अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 50 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  06 जून, 2019

             ‘‘योग द्वारा स्वस्थ रीढ़’’
             अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण के तृतीय दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ किया गया। इसके पश्चात् खड़े होकर सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद खड़े होकर किये जाने वाले आसनों में ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, वृक्षासन, एकपाद संतुलनासन, त्रिकोणआसन (1 व 2 प्रकार), पादहस्तासन का अभ्यास करवाया गया। 
             इसके पश्चात् सूर्यनमस्कार के 8 चक्रों का अभ्यास श्वास-प्रश्वास के साथ करवाया गया। इसके पश्चात् पीठ के बल लेटकर 05 मिनट शिथलीकरण करवाया गया। इसके बाद आसनों के क्रम में पवनमुक्तासन, कंधरासन, मत्स्यासन का अभ्यास करवाया गया। इसके उपरांत पेट के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में मकटासन, भुजंगासन, सर्पासन, शलभासन, शशांक-भुजंगासन, बालासन का अभ्यास करवाया गया। 
             क्रिया में कपालभांति, प्राणायाम में नाड़ीशोधन, शीतली एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। सभी से आहार संबंधित अनुशासन रखने को कहा गया एवं नींद 6-7 घंटे लेने की सलाह दी गई। सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 55 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  07 जून, 2019

           योग द्वारा कब्ज, गैस से मुक्ति
           अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण के चतुर्थ दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ किया गया। इसके पश्चात् सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् बैठकर किये जाने वाले आसनों के क्रम में चक्की चालन, नौकासंचालन, जानुसिरासन, पश्चिमोत्तानासन, अर्द्धमत्स्येन्द्रासन, वज्रासन, मण्डूकासन, उष्ट्रासन, शशांकासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् खड़े होने वाले आसनों के क्रम में उत्कटासन, ताड़ासन, वृक्षासन, एकपादतुलासन, वीरासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् सूर्यनमस्कार के 10 चक्रों का श्वास-प्रश्वास के साथ अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् शिथलीकरण हेतु 10 मिनट का शवासन का अभ्यास करवाया गया। 
            क्रिया में कपालभांति, प्राणायाम में नाड़ीशोधन, शीतली एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 53 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  08 जून, 2019

           ‘‘सोऽमं ध्यान’’
            अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण के पंचम दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ किया गया। इसके पश्चात् सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद कपालभांति क्रिया के तीन चक्रों का अभ्यास करवाया गया। 
            प्राणायाम में नाड़ीशोधन, भस्त्रिका, उज्जायी, शीतली एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् अभ्यासियों का सोऽमं ध्यान का अभ्यास करवाया गया। ध्यान की प्रक्रिया में अभ्यासियों को ध्यानात्मक स्थिति में बैठाकर शरीर को निष्क्रिय करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद 50 मिनट तक ध्यान का अभ्यास निर्देशानुसार चलता रहा। 
            सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 51 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  10 जून, 2019

           ‘‘श्वसन एवं पाचन संस्थान हेतु योग’’
           अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण के सप्तम दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ किया गया। इसके पश्चात् सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद खड़े होकर किये जाने वाले आसनों के क्रम में ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, त्रिकोणासन, वृक्षासन, अर्द्धचक्रासन, उत्कटासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद पीठ के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में साइकल चालन, उत्तानपादासन, अर्द्धहलासन, पवनमुक्तासन, मटकटासन का अभ्यास करवाया गया। 
           इसके पश्चात् बैठकर किये जाने वाले आसनों में वज्रासन, मण्डूकासन, शशांकासन, पर्वतासन, सिंहासन का अभ्यास करवाया गया। प्राणायाम में शीतली, सीतकारी, नाड़ीशोधन, भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 50 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  11 जून, 2019

‘          ‘कमर एवं रीढ़ के दोषों का योग द्वारा निराकरण’’
           अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण के अष्टम दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ किया गया। इसके पश्चात् सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद खड़े होकर किये जाने वाले आसनों में कटिचक्रासन, अर्द्धकटिचक्रासन, ताड़ासन, पाश्र्वकोणासन, पादहस्तासन, अर्द्धचक्रासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद सूर्यनमस्कार के 6 चक्रों का श्वास-प्रश्वास के साथ अभ्यास करवाया गया। 
            इसके पश्चात् पेट के बल किये जाने वाले आसनों में नाभ्यासन, भुजंगासन, सर्पासन, शलभासन, बालासन, मकरासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद 05 मिनट योग निंद्रा का अभ्यास करवाया गया। क्रिया में कपालभांति के तीन चक्र, प्राणायाम में नाड़ीशोधन, शीतली, शीतकारी, उज्जयी का अभ्यास करवाया गया। 
           आज के सत्र में बंध के अभ्यास में जालंधर बंध करवाया गया। सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 54 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  12 जून, 2019

           ‘‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हेतु योग नवाचार का अभ्यास’’
            अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण के नवां दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ किया गया। इसके पश्चात् सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद बैठकर किये जाने वाले आसनों के क्रम में चक्कीचालन, नौकासंचालन, वज्रासन, मण्डूकासन, उष्ट्रासन, शंशाकासन, वक्रासन, का अभ्यास करवाया गया।
इसके बाद खडे़ होकर किये जाने वाले आसनों में ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, त्रिकोणासन, अर्द्धचक्रासन, पादहस्तासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् श्वास-प्रश्वास के साथ सूर्यनमस्कार के 8 चक्रों का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद पीठ के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में पवनमुक्तासन, उत्तानपादासन, मरकटासन, कंधरासन, अर्द्धहलासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् शिथलीकरण हेतु 05 मिनिट योगनिंद्रा का अभ्यास करवाया गया। क्रिया में कपालभांति, प्राणायाम में नाडीशोधन, शीतली, सीतकारी एवं भ्रमारी का अभ्यास करवाया गया। 
              आज के सत्र में बंध के अभ्यास में जालंधर बंध करवाया गया। सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 55 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  13 जून, 2019

             ‘‘पेट की अतिरिक्त वसा से मुक्ति में योग की भूमिका’’
            अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण का दसवां दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् पीठ के बल लेटकर किये जाने वाले आभ्यसों में साईकल चालन, पादचक्रासन, उत्तानपादासन (कोण - 30°, 60°, 90°-कोण ), नौकासन, पवनमुक्तासन, अर्द्धहलासन, मरकटासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद पेट के बल किये जाने वाले आसनों में मकरासन (प्रकार 1, 2, 3), नाभ्यासन, भुजंगासन, सर्पासन, तिर्यक भुजंगासन, शलभासन (अर्द्ध एवं पूर्ण), बालासन का अभ्यास करवाया गया।
             क्रिया में कपालभांति, प्राणायाम में नाडीशोधन, शीतली, एवं भ्रमारी का अभ्यास करवाया गया। सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 51 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  14 जून, 2019

             ‘‘समग्र स्वास्थ्य हेतु योग’’
            अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण का ग्यारहवें दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् खड़े होकर किये जाने वाले आसनों में उत्कटासन, कटिचक्रासन, ताड़ासन, मूर्धासन, वृक्षासन, वीरासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद पीठ के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में पवनमुक्तासन, आनंदबालासन, अर्द्धहलासन, मरकटासन का अभ्यास करवाया गया।
इसके बाद पेट के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में भुजंगासन, शलभासन, मकरासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद बैठकर किये जाने वाले आसनों में वज्रासन, मण्डूकासन, उत्तानमण्डूकासन, सिंहासन का अभ्यास करवाया गया। 
              क्रिया में कपालभांति, प्राणायाम में नाडीशोधन, शीतली, एवं भ्रमारी का अभ्यास करवाया गया। सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 55 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  15 जून, 2019

             ‘‘संतुलित आहार-स्वस्थ जीवन’’
            अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण के बारहवें दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासतेेेे'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् क्रिया में कपालभांति, प्राणायाम में नाड़ीशोधन, शीतली, सीतकारी, उज्जयी एवं भ्रामरी का अभ्यास करवाया गया। योग प्रशिक्षण शिविर में विशेष व्याख्यता के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय की योग एवं मानव चेतना विभाग की वरिष्ठ अतिथि शिक्षिका डाॅ. शैलजा त्रिवेदी सम्मिलित हुईं। डाॅ. त्रिवेदी ने आहार एवं स्वास्थ्य की अवधारणा तथा वर्तमान परिपेक्ष्य में अनियमित खान-पान, जीवनशैली के प्रभावों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। 
             डाॅ. त्रिवेदी ने बताया कि वर्तमान की अनियमित जीवन शैली, असंतुलित आहार एवं तनाव के कारण रोग उत्पन्न हो रहे हैं। जैसे- मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग, थाॅयराइड देखने को मिल रहा है। इनका निवारण संतुलित आहार से किया जा सकता है। खान-पान में मौसमी फल-सब्जी का उपयोग महत्वपूर्ण है। आहार में फलों व पत्तेदार सब्जियों के शामिल करने से शरीर में एन्टी-ऑक्सीडेन्ट मिलते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। डाॅ. त्रिवेदी ने पानी पीने का सही तरीका एवं नियमित दिन चर्चा से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव दिए। 
             बाद में सभी अभ्यासियों ने विषय संबंधी जिज्ञासा पूरी करने प्रश्न किये जिनके संतुष्टिपूर्ण उत्तर डाॅ. त्रिवेदी द्वारा दिये गये। सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 55 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  17 जून, 2019

             ‘‘योग द्वारा मधुमेह का प्रबंधन’’
             अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण का 14वें दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् बैठकर किये जाने वाले अभ्यासों के क्रम में चक्कीचालन, नौका संचालन, भद्रासन, वक्रासन, वज्रासन, मण्डूकासन, उष्ट्रासन, शशांकासन, उत्तान मण्डूकासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद खड़े होकर किये जाने वाले आसनों में कटिचक्रासन, उत्कटासन, ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्द्धचक्रासन अभ्यास करवाया गया।
              इसके बाद सूर्यनमस्कार के 08 चक्रों का श्वास-प्रश्वास के साथ अभ्यास करवाया गया। इसके बाद पीठ के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में पवनमुक्तासन, मरकटासन, कंधरासन का अभ्यास करवाया गया। शिथलीकरण हेतु 05 मिनिट शवासन करवाया गया। 
              क्रिया में कपालभांति, प्राणायाम में नाडीशोधन, शीतली, एवं भ्रमारी का अभ्यास करवाया गया। सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 51 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  18 जून, 2019

            ‘‘कब्ज, गैस एवं पेट संबंधी अन्य समस्याओं का योग द्वारा प्रबंधन’’
           अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण का 15वें दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करते हुए सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् खड़े होकर करने वाले आसनों के क्रम में कटिचक्रासन, ताड़ासन, पादहस्तासन, अर्द्धचक्रासन, त्रिकोणासन, उत्कटासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् पीठ के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों के क्रम में पवनमुक्तासन, उत्तानपादासन, अर्द्धहलासन, मरकटासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद पेट के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में भुजंगासन, सर्पासन, शलभासन, धर्नुआसन, मकरासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् शिथलीकरण हेतु 05 मिनट का शवासन का अभ्यास करवाया गया। बैठकर किये जाने वाले आसनों में वज्रासन, उष्ट्रासन, सिंहासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद अतिरिक्त गतिविधियों में करतल अभ्यास, हास्यासन क्रम एवं मूलबंध का विशिष्ट अभ्यास कराया गया।
            क्रिया में कपालभांति, प्राणायाम में नाडीशोधन, शीतली, एवं भ्रमारी का अभ्यास करवाया गया। सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 52 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  19 जून, 2019

            ‘‘मनोदैहिक रोगों में योग की भूमिका’’
            अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण का 16वें दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ किया गया, इसके पश्चात् सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद खड़े होकर किये जाने वाले आसनों के क्रम में कटिचक्रासन, ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्द्धचक्रासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् सूर्यनमस्कार के 06 चक्रों का अभ्यास श्वास-प्रश्वास के साथ किया गया। पीठ के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में पवनमुक्तासन, उत्तानपादासन, नौकासन का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद पेट के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में भुजंगासन, सर्पासन, मकरासन, शलभासन, बालासन का अभ्यास करवाया गया। इसके पश्चात् बैठकर किये जाने वाले आसनों में दण्डासन, वज्रासन, मण्डूकासन, शशांकासन, सिंहासन का अभ्यास करवाया गया। 
              क्रिया में कपालभांति, प्राणायाम में नाडीशोधन, शीतली, एवं भ्रमारी का अभ्यास करवाया गया। सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 56 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  20 जून, 2019

           ‘‘योग-संतुलन, स्वास्थ्य एवं आनंद’’
            अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत चल रहे 50 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का तृतीय चरण का 17वें दिवस प्रार्थना ''संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्दे वा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते'' से आरंभ करवाया गया। इसके पश्चात् सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया गया। इसके बाद योग अभ्यास क्रम के नवाचार को करवाया गया। आज विशेष व्याख्यान हेतु योगाचार्य प्रेरक वक्ता श्री आर. के. भारती को आमंत्रित किया गया। जिन्होंने अपना व्याख्यान योग क्या है? से आरंभ करते हुए, योग कैसे करें ?, योग कैसे समझे ? एवं योग से कैसे संतुलन एवं स्वास्थ्य पाये? पर जानकारी साझा की। 
            योग किस प्रकार तनाव, मधुमेह एवं रक्तचाप को नियंत्रित रखता है, इस विषय में महत्वपूर्ण जानकारी दी। श्री भारती ने बताया कि योग सिर्फ शरीर से करना ही काफी नहीं है इसके लिए मन को साथ रखना भी आवश्यक है। इसके साथ ही श्वसन संस्थान एवं रक्त परिसंचरण का महत्व बताते हुए योग से इन्हें कैसे दृढ़ एवं संतुलित रख सकते हैं, यह भी बताया। 
            श्री भारती ने अलग-अलग उम्र के अभ्यासियों के लिए अपनी क्षमतानुसार तथा मन को शांत एवं आनंदित रखते हुए योग करने का सुझाव दिया। 21 जून 2019 पंचम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सभी अभ्यासियों को शुभकामनाएं प्रदान करते हुए सभी से योग को नियमित रूप से अपने जीवन में सम्मिलित करने का आह्वान किया। 
            सत्र को तीन बार दीर्घ ''ॐ'' का उच्चारण कर शांति पाठ ''ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित् दुःखभाग भवेत।'' के साथ अभ्यास को विराम दिया गया। आज के अभ्यास में 58 अभ्यासियों ने सहभागिता दर्ज करायी। शिविर में योग एवं मानव चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना ठाकुर उपस्थित रहीं और शिविर का संचालन योग प्रशिक्षक श्री राहुल शर्मा द्वारा किया गया।

                              

दिनांक  21 जून, 2019

            अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। योग एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसमें शरीर मन और आत्मा को एक साथ जोड़कर स्वास्थ्य लाभ लिया जाता है। विश्वविद्यालय में योग दिवस पर माननीय कुलपति और कुलसचिव के साथ सभी शिक्षकों कर्मचारियों ने योगाभ्यास किया।
             हिंदी विश्वविद्यालय में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। विश्वविद्यालय के योग विभाग द्वारा आयोजित इस आयोजन में जोड़ो को लचीला बनाने वाला सूक्ष्म व्यायाम के अलावा ताड़ासन, वृक्षासन, अर्ध चक्रासन का अभ्यास किया गया। इसके बाद बैठकर किए जाने वाले आसनों में दंडासन, भद्रासन, वज्रासन, अर्ध उष्ट्रासन पूर्ण उष्ट्रासन शशांक आसन उत्तानपादासन और वक्रासन किया गया। वही पेट के बल लेटकर करने वाले आसन में मकरासन भुजंगासन शलभासन का अभ्यास किया गया। इसके बाद पीठ के बल लेटकर करने वाले आसनों में सेतुबंधासन अर्ध हलासन पवनमुक्तासन हुआ। आसनों के बाद शरीर को आराम देने वाले शवासन का अभ्यास किया गया। क्रिया में कपाल भारती प्राणायाम में नाड़ी शोधन शीतली और ब्राह्मी आसन किए गए । इस मौके पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. रामदेव भारद्वाज ने अपने उद्बोधन में कहा कि आत्मा शरीर रूपी घर में निवास करती है जिसे योग द्वारा स्वच्छ रखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि मन बुद्धि और आत्मा का संतुलन योग से ही संभव है। दुनिया में 173 से ज्यादा देश में योग किया जा रहा है योग दुनिया को भारत की अमूल्य देन है। कार्यक्रम में मौजूद विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ बी भारती ने योग को शरीर मन आत्मा को जोड़ने और चेतना को प्रखर बनाने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने इस मौके पर योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की अपील की । आयोजन के अंत में योग एवं चेतना विभाग के प्रभारी डॉ ज्ञान शंकर तिवारी ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन योग प्रशिक्षक राहुल शर्मा ने किया जबकि 2 मई से 20 जून तक तीन चरणों में 50 दिन तक चले योग शिविर की विस्तृत जानकारी और उपलब्धि डॉ भावना ठाकुर ने दी । कार्यक्रम के अंत में योग साधकों को अंकुरित आहार और छाछ का वितरण किया गया।

                              

                             

 

 

 

 

 


                                         
                                         

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